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लोकतंत्र में राजतंत्र Monarchy in democracy (भाग-12 )

                                                                        -:ओ३म्:-    लोकतंत्र में राजतंत्र भाग-12                भारतीय ऋषि-मुनियों द्वारा प्रकृति संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अर्थव्यवस्था एवं मानवीय विकास की कुछ सीमाएं एवं मर्यादाओं को तय किया था । जो मैं लेख संख्या 11 में वर्णन कर चुका हूं ।                  प्रकृति एवं प्रकृति के विभिन्नताओं के मध्य अर्थव्यवस्था का विकास होता है । भारत वह देश है जो विश्व के मानचित्र पर विश्वतिय रेखा के ठीक 8.4' डिग्री ऊपर स्थित है । जिसके कारण भारत संशीतोष्णकटिबंध का है । भारत में 6 प्रकार के ऋतु एवं 15 प्रकार के क्लाइमेटिक जोन पाए जाते हैं । भारत का उत्तरी भाग ठंड एवं दक्षिणी भाग गर्म प्रधान है। जहाँ भारत का एक भाग काफी ठंड, हिमालय आदि पर्वतों से घिरा है । वहीं दु...

लोकतंत्र में राजतंत्र Monarchy in democracy (भाग-11 )

                                                                       -:ओ३म्:-   लोकतंत्र में राजतंत्र (भाग-11 )                1947 के बाद अर्थव्यवस्था के आधुनिक स्वरूप पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत में उभरा जिसने भारत की सभ्यता एवं सांस्कृतिक परिधि के मूलाधार पर आघात किया ।                 पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के विषय में बात करने से पूर्व भारतीय अर्थव्यवस्था को एक बार समझ लें तो ठीक ही रहेगा । भारत में अर्थव्यवस्था एवं मानवीये विकास की कुछ मर्यादाएं एवं सीमाएं भारतीय ऋषि-मुनियों ने तय किया था । उसे भी समझना नितांत आवश्यक है ।             आइए इसको एक उदाहरण से समझते हैं । विवाह के 8 साल के बाद भगवत् कृपा से एक नए दंपत्ति को संतान की प्राप्ति हुई । धीरे-धीरे स...