अर्धनग्न समाज का कुतर्क
"अर्धनग्न समाज का कुतर्क" महिलाओं की एक शिकायत मर्दों से हमेशा रहती है । वें अपना सोच क्यों नहीं बदलते हमारे कपड़ों पर ही उनका ध्यान क्यों अटकता है ? मर्दों को अपनी सोच बदलनी चाहिए और अपनी नियत को साफ रखना चाहिए । ऐसा उपदेश अक्सर सुनने को मिलता है । आईए इस विषय पर थोड़ी बहुत चर्चा कर लेते हैं । बात सोच बदलने या नीयत को साफ करने की नहीं है । बात यहां मानवीय प्रवृत्ति , चेतनता का विकास एवं मनोविज्ञान को समझने की है । मेरी अगर आप सुनें तो इस विषय पर और गहराई से विचार करना चाहिए । मनुष्यों को छोड़कर दुनिया का कोई जीव ऐसा नहीं है जो वस्त्र पहनता हो । चुकी मनुष्य का विकास वर्तमान विज्ञान के कथानानुसार जानवरों से हुआ है । तो फिर मनुष्य के वस्त्र पहनने का क्या मतलब है ? और अपने देश भारत की कहें तो यहां पर एक सन्त हुए हैं । जिन्होंने कहा कि वस्त्र पाहनने की कोई जरूरत है ही नहीं है । यह स्वतंत्र वायु और आकाश ही हमारा वस्त्र है । अब हमारे संत ने ही हमें नंगे रहने का उपदेश दे दिया हो तो बेचारी इन अल्पबुद्धि वाली महिलाओं पर क्या दोषारोपण करें । और अब पश्चि...