संदेश

मार्च, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

समय

मैं समय हूं साहब  लौट कर जरूर आता हुं अगर दोषी अब्दुल नहीं था  तो कह दो गांधी से  अपराधी नाथु भी नहीं था  भला क्या करता गोडसे  क्योंकि देश टूटा था  कड़ाके कि ठंड थी  जिसने तुम्हें बापू कहा था  उनका आसियाना तुने लुटा था  तेरे ज़िद पर देश भिक्षु बना था युद्ध के बाद पेट उनका भरा  कर्ज हमें लेना पड़ा था  मैं समय हूं साहब करवट जरूर लेता हुं  कह दो द्रोण से  वीर अर्जुन के न होने पर भी  अगर चक्रव्यूह रचना ठीक था  अकेले अभिमन्यु के रुधिर से रण रंगीन करना ठीक था  तो भीम का असत्य बोलना भी ठीक था । मैं समय हूं साहब कुछ नहीं भुलता  तुने दोस्ती को ढाल बनाकर अधर्म किया था । याद कर वो दिन  दान वीर कर्ण तुने उसे वेश्या कहा था  मुझसे समय मांगते हो उस दिन मेरा अभिमन्यु योद्धाओं के बीच निहत्था खड़ा था मैं समय हूं साहब हिसाब सबका रखता हुं मेरा निर्धन पिता घर से अकेला चला था दरबार एसे ही सजा था याद कर वो दिन बंदी  तुने शास्त्र को शस्त्र बनाया था काहोड़ को जल समाधि दिया था आज समय मेरे पक्ष में है  बोल तुम...