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कैसे गुलाम बनाएं

 कैसे गुलाम बनाएं  अगर आप किसी समाज को, किसी देश को, किसी राष्ट्र को गुलाम बनाना चाहते हैं । तो सबसे सरल और आसान उपाय यह है कि आप व्यक्ति से व्यक्ति को तोड़ दें, उनके बीच की दूरी को बढा दें । आप ऐसा कुछ करें ताकि उनका नैतिक विकास न हो वरण पतन हो जाए, उनका चरित्रहीन होना भी जरूरी है । हर व्यक्ति महत्वकांक्षी हो जाए । आप ऐसा कुछ करें ताकि हर व्यक्ति अपने व्यक्तिगत विकास को ही राष्ट्रीय विकास समझें। उसके अंदर अपना कोई आत्मस्वाभिमान न बचे। दूसरों के दिए हुए टुकड़ों पर ही पलना उनके लिए आत्म सम्मान होना चाहिए । रिश्ते इतने कमजोर होने चाहिए ताकि बृहद परिवार तो दूर की बात है एकल परिवार में भी पति-पत्नी एक दूसरे के साथ खुश न रह सकें । आप इस बात का ध्यान रखें उस समाज का हर व्यक्ति अपने आप को मालिक समझें । वह कभी भी किसी की न सुने । शिष्टाचार, संस्कार, विश्वास, इमानदारी, दिनचर्या, आदि इन सभी शब्दों का कोई मतलब उस समाज में नहीं होना चाहिए जिसे आप ग़ुलाम बनाना चाहते हैं ।              उनको आप नशा के आदि बनाए । हिंसक बना दें, क्रुर, अड़ियल, विश्वासघाती, ला...

अनपढ़ सासू मां

अनपढ़ सासू मां मैं रो रही थी, तभी मम्मी रूम में आ गई मम्मी ने पूछा क्या हो गया मैंने झूठ बोल दी। मैं बोली पेट दर्द कर रहा है। मम्मी ने कहा डॉक्टर के पास चलो, मैंने मना कर दिया।           बात यूं थी कि आज मेरी शादी की तीसरी सालगिरह थी मेरी सासू मां आज मुझे वापस ले जाने के लिए मेरे घर आई थी ताकि मनाकर मुझें ले जा सके। जबकि तलाक हो चुका है। पर संयोग बस मम्मी और मेरी बुआ दोनों घर पर थी और दोनों ने उनकी बेइज्जती कर घर से भेज दिया। सासू मां लौटते समय एक बार ऊपर देखी, खिड़की पर मैं उनको दिख गई। उनका मन दुखी था और आंखों में आंसू, मुझसे गलति यह हुई कि मैं खिड़की बंद कर दी। मुझे लगता है कि यह मेरी सबसे बड़ी गलती थी। आज मुझे अपने सासू मां के साथ खड़े होने चाहिए थे जब मम्मी और बुआ उनकी बेइज्जती कर रही थी।                मेरा नाम प्रीया और मैं अपने ही क्लास के एक लड़के से प्रेम करती थी। आधुनिक जमाना है हम दोनों के पास मोबाइल था हम एक दूसरे से बात करते। कब प्रेम हो गया पता ही न...