संदेश

दिसंबर, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

निडर भाभी

रात के आठ बजे थे। इस समय भाभी अपनी पड़ोसन के साथ संस्कृत पढ़ा करती थीं। इसके लिए उन्होंने एक प्राध्यापक नियुक्त कर रखा था। तभी दरवाजे से कोई उन्हें आवाज लगाया। किताब एक ओर रखकर भाभी बाहर आ गई और उन्हें अंदर आने के लिए कहा। वें धीमे स्वर में बोलें, "भाभी, एक विशेष काम है। लेकिन तत्काल नहीं बताया जा सकता।" "तो फिर थोड़ा रुक जाइए।" यह कहकर भाभी अंदर चली गई । अध्यापक जी को कोई कारण बताकर पढ़ाई बंद कर दी। अध्यापक और पड़ोसन के चले जाने के बाद उन्होंने उन को अंदर बुलाया और काम पूछा। "घर में पैसे पड़े है?" उन्होंने एकदम प्रश्न किया। "हाँ, पड़े है। बताओ, कितने चाहिए?" "जितने भी हो, सारे चाहिए। कमर में लटका चाभी का गुच्छा निकालकर अलमारी खोली और साड़ियों के तह में  सँभालकर रखे हुए पाँच सौ रूपया निकालकर उनको पकड़ा दिए। हाथ में पैसे लिये वे अभी भी चिंतित दिखाई दे रहा था। सहसा उसने पूछा, "भाभीजी, आप बाहर जा सकेंगी? इस शहर से बाहर?"  कहां जाना है?" भाभी ने प्रश्न किया। "एक आदमी को लाहौर के बाहर पहुँचाना है। उसके साथ मेम साहब बनकर जाना होगा। का...