समय

मैं समय हूं साहब 
लौट कर जरूर आता हुं
अगर दोषी अब्दुल नहीं था 
तो कह दो गांधी से 
अपराधी नाथु भी नहीं था 
भला क्या करता गोडसे 
क्योंकि देश टूटा था 
कड़ाके कि ठंड थी 
जिसने तुम्हें बापू कहा था 
उनका आसियाना तुने लुटा था 
तेरे ज़िद पर देश भिक्षु बना था
युद्ध के बाद पेट उनका भरा 
कर्ज हमें लेना पड़ा था 
मैं समय हूं साहब
करवट जरूर लेता हुं 
कह दो द्रोण से 
वीर अर्जुन के न होने पर भी 
अगर चक्रव्यूह रचना ठीक था 
अकेले अभिमन्यु के रुधिर से
रण रंगीन करना ठीक था 
तो भीम का असत्य बोलना भी ठीक था ।
मैं समय हूं साहब
कुछ नहीं भुलता 
तुने दोस्ती को ढाल बनाकर अधर्म किया था ।
याद कर वो दिन 
दान वीर कर्ण
तुने उसे वेश्या कहा था 
मुझसे समय मांगते हो
उस दिन मेरा अभिमन्यु
योद्धाओं के बीच निहत्था खड़ा था
मैं समय हूं साहब
हिसाब सबका रखता हुं
मेरा निर्धन पिता
घर से अकेला चला था
दरबार एसे ही सजा था
याद कर वो दिन बंदी 
तुने शास्त्र को शस्त्र बनाया था
काहोड़ को जल समाधि दिया था
आज समय मेरे पक्ष में है 
बोल तुम्हें क्या सजा दूं
मैं अष्टावक्र क्या अतीत दोहरा दूं
मैं समय हुं साहब 
उधार कभी नहीं रखता 
करपात्री जी ने आशीर्वाद दिया था
पुरा करुंगी तुने वचन लिया था 
शासन तुम्हें मिला था
देश का शान बढ़ा था 
पर क्या संतों पर वार करना उचित था 
तब बुरा मुझे भी लगा था 
कोई क्या करे समय कभी उधार नहीं रखता ।

वैदिक सुप्रभात
उत्तम प्रकाश
9416044828




























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