लोकतंत्र में राजतंत्र Monarchy in democracy(भाग-1)

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 लोकतंत्र में राजतंत्र ( भाग-1 )
Monarchy in democracy

             
            "जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए शासन" लोकतंत्र की एक नई परिभाषा गढ़ी गई । एक के बाद एक विभिन्न अलग-अलग देशों पर ब्रिटेन ने अपना साम्राज्य धीरे-धीरे स्थापित करता गया । जब उन सभी देशों में क्रांति की लहर जगीे । उन्होंने स्वतंत्र होना चाहा तब ब्रिटेन, लोकतंत्र का हवाला देकर वहां के राजतंत्र को समाप्त किया और उन सभी देशों में धीरे-धीरे लोकतंत्र स्थापित किया ।  लोकतंत्र लाने के लिए राजतंत्र की अनेकों बुराइयां आम जनता के सामने परोसी गई । दूसरी ओर जनता खुद मालिक होना चाहती थी परिणाम यह हुआ क्रांतिकारी विचारधारा के लोग लोकतंत्र में नेता बनकर उभरे हालांकि वें सभी नेता अंग्रेजों द्वारा चलाए गए शिक्षा तंत्र से ही पढ़ कर निकले थे । अब आप सोच सकते हैं कि अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था से निकले हुए लोग देश को किस दिशा की ओर ले जाते । 
            जहां दूसरी ओर विभिन्न अलग-अलग देशों में लोकतंत्र आया वही ब्रिटेन में आज भी रानी का राज्य स्थापित है । आज भी वहां राजतंत्र है । आज भी वहां के लोग रानी को महारानी मानते हैं । आज भी वहां राज परिवार है और राज परिवार के सदस्यों को लोग आदर- मान भी देते हैं । 
            शेर तो यही चाहता है न कि मैं जंगल में अकेला रहूं । ब्रिटेन ने ऐसा किया तो भला क्या बुरा किया ? हां यह बात अलग है कि उसने बाकी दुनिया को लोकतंत्र का हवाला देकर बेवकूफ बनाया ।
             मैं अपने दृष्टिकोण से लोकतंत्र उसे मानता हूं जिसमें आम जनता संपूर्ण प्राकृतिक संपदा का मालिक हो और शासक का मुख्य रूप से तीन ही दायित्व हो । 

1. राष्ट्र की संपूर्ण संपत्ति की रक्षा करना ।
2. राष्ट्रीय संपूर्ण जीवित प्राणी के साथ न्यायिक दृष्टिकोण बनाकर व्यवहार करना और उन्हें न्याय देना ।
3. देश के बाहरी सीमा की सुरक्षा करना । 
             केवल इन्हीं तीन व्यवस्था को चलाने हेतु जनता से उचित कर लेना ।  
 शिक्षा ,चिकित्सा, यातायात, रिसर्च-अनुसंधान , कृषि , पशु पालन गौशाला , धार्मिक व्यवस्था, जमीन के अंदर का खनिज तत्व, जंगल, पहाड़, नदियों एवं तालाबों का पानी , संपूर्ण प्राकृतिक संपत्ति आदि इन सभी चीजों पर जनता का अपना मालिकाना हक होना चाहिए । इस देश में कोई भी व्यक्ति एक दूसरे के साथ जमीन की खरीद बिक्री नहीं करता था । जमीन, पशु, बीज, कला, शिक्षा आदि अन्य कई चीजें दान स्वरूप ली और दी जाती थी। 
                      मुख्य रूप से शासक का उपर्युक्त लिखित तीन कार्य होता था । 
                                         जबकि वर्तमान के लोकतंत्र में जनता के पास केवल और केवल वोट देने का अधिकार है अर्थात् लॉलीपॉप देकर अंग्रेजी सरकार ने बाकी सभी चीजों को अपने हाथ ले लिया । जनता द्वारा चुना गया प्रतिनिधि देश की संपत्ति के साथ कुछ भी करें बाकी मीडिया तो जनता को संभाल ही लेती है । 
            1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद भारत में स्थित कंपनी सरकार के बाद ब्रिटेन की रानी का सरकार आया।उसने सबसे पहले भारत की संपूर्ण प्राकृतिक संपदा को सरकारी घोषित कर दिया । इसके लिए अलग-अलग एक्ट बनाए गये जैसे:- इंडियन फॉरेस्ट एक्ट कुछ भारतीयों के द्वारा बगावत की गई उन्हें डाकू एवं आतंकवादी कहां गया । अंग्रेजों ने अपनी व्यवस्था को भारत में सही सलामत लागू करने के लिए इंडियन पुलिस एक्ट बनाया । आने वाली अगली पीढ़ी ब्रिटेन के द्वारा स्थापित तीन यूनिवर्सिटीज् में शिक्षा ग्रहण करने लगी । धीरे-धीरे उन्हें यह ज्ञान दिया गया कि भारत की संपूर्ण प्राकृतिक संपदा सरकारी है। इन सभी प्राकृतिक संपदा को धीरे-धीरे ब्रिटेन ले जाया गया इसके लिए ब्रिटेन सरकार ने धीरे-धीरे विभिन्न अलग-अलग विभाग बनाएं उन विभागों में अपने अंग्रेजी अफसरों को नौकरी दी , व्यक्ति का अभाव होने के कारण भारतीयों को भी नीचे के पदों पर नौकरी देना प्रारंभ किया । उन सभी विभिन्न पदों पर कार्यरत अधिकारियों के लिए विभिन्न प्रकार की कई अलग-अलग सुविधाएं जैसे गाड़ी की सुविधा , आवास रहने की सुविधा, नौकर- चाकर, पेंसन,  मेडिकल आदि और मासिक तनख्वाह सारी व्यवस्था की गई । मासिक तनख्वाह देने के लिए जनता से टैक्स के माध्यम से अधिक से अधिक पैसा वसूला गया । अब भारत से प्राकृतिक संपदा तो बहुत आसानी से ब्रिटेन जा ही रहा था साथ ही विभिन्न अंग्रेजी अफसरों के माध्यम से उनके तनख्वाह के रूप में धन भी ले जाया गया ।
             स्वतंत्रता के बाद यह संपूर्ण व्यवस्था ज्यों की त्यों इस देश में बनी रही।  सरकारी अफसरों के लिए अंग्रेजों द्वारा दी गई संपूर्ण सुविधा भी उसी प्रकार उन्हें मिलती रही । परिणाम यह हुआ कि अगर कोई सरकारी अफसर हो गया, मतलब वह सरकार का दमाद है । अब आप यह बताएं कौन ऐसा भारतीय हैं जो सरकार का दमाद न बनना चाहता हो । 
             वर्तमान लोकतंत्र में अनपढ़ गवार कोई भी व्यक्ति 5 वर्ष के लिए नेता बन सकता है नेता बनकर विश्व बैंक में देश से पैसा लूट कर जमा कर सकता है और देश को विकास के मार्ग पर ले जाने के लिए बाहर से अधिक से अधिक कर्ज ले सकता है । आज के आधुनिक लोकतंत्र में एक बात सामान्य रूप से अक्सर सुनने को मिलता है कि अगर विकास करना है तो कर्ज लेना ही पड़ेगा । कर्ज लेकर भारतीय करेंसी को अंतरराष्ट्रीय मार्केट में उसकी करेंसीक् वैल्यू को कम से कम कर सकता है । मतलब यह है कि पहले अंग्रेज लूटते थे अब आप उन्हीं के व्यवस्था से पढ़ लिख कर के देश को लूटने में उनका हाथ बटा रहे हैं ।
              अब इस नए लोकतंत्र में देश या विदेश की बड़ी-बड़ी कंपनियों के हाथ में राष्ट्र की संपूर्ण प्राकृतिक संपत्ति जा रही है । आम जनता अपने ही खर्च से पढ़ाई करें, अपने ही खर्च से चिकित्सा करें, अपने ही खर्च से अपना जीवन यापन करें । हालांकि भारत सरकार चिकित्सा के लिए, शिक्षा के लिए और न्याय के लिए ऑलरेडी पूरी जिंदगी भर प्रत्येक भारतीय से टैक्स लेती है । पर फिर भी हम प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजते हैं। प्राइवेट चिकित्सालयों में अपनी चिकित्सा करवाते हैं और न्याय के लिए प्राइवेट वकील को हम हायर करते हैं । अब हम दोनों जगह पैसा खर्च करते हैं सरकार को भी टैक्स के रूप में देते हैं और इन सभी चीजों के लिए अलग से भी पैसा खर्च करते हैं ।
                मतलब यह है कि हमें पैतृक रूप से प्राप्त ज्ञान, कला,  रोजगार, शिक्षा का इस लोकतंत्र में कोई मतलब नहीं है । सरकारी डिग्री का होना अनिवार्य है । पैतृक रूप से प्राप्त मकान जमीन का भी हमें टैक्स देना पड़ता है । कुछ भी प्राप्त नहीं होगा हमको अंततः नौकर ही बनना है । 
                                         फिर भी यह लोकतंत्र बहुत ही खूबसूरत है ऐसा लोग कहते हैं । 
                                                                                                                          शेष आगे   क्रमश:
 उत्तम प्रकाश 
वैदिक सुप्रभात
 94 16044 828

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