लोकतंत्र में राजतंत्र Monarchy in democracy (भाग 4)
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लोकतंत्र में राजतंत्र (भाग 4)
1857 में ब्रिटेन की रानी का सरकार इस देश में आया । यह सरकार अगले 100 वर्षों तक चलने वाली थी । 100 वर्ष में 5 पीढ़ी हो जाती है। तो कुछ ऐसी तैयारी करनी थी ताकि भविष्य का भारत वास्तव में ब्रिटेन हो जाए । भारत में रहने वाले भारतीय कहलाए जरूर पर अंदर से वह भारतीय न होकर पूर्ण रूप से अंग्रेज बन जाए । ब्रिटेन का मूल उद्देश्य एक तो भारत की संपत्ति को लूटना , उनको गुलाम बनाना और दूसरा पूरे भारतवर्ष का ईसाई करण करना था ।
इन दोनों कार्यों के लिए अपने हिसाब से तंत्र को चलाई जाए । दूसरी शिक्षा व्यवस्था अपने हाथ में ली जाए । इसके लिए ब्रिटेन सरकार ने इंडियन एजुकेशन एक्ट लाया ।
इस एजुकेशन एक्ट के माध्यम से अंग्रेजी सरकार ने भारत के प्राचीन गुरुकुलिय शिक्षा प्रणाली को ध्वस्त किया । जिसके कारण अपने देश भारत का ब्राह्मण समुदाय जिनका जीवन यापन गुरुकुल एवं गुरुकुल में मिलने वाले दानों पर टिका हुआ था । वें पूर्ण रुप से बेरोजगार हो गये । गुरुकुल से पढ़ कर आने वाले विद्यार्थियों के लिए नौकरी की कोई व्यवस्था नहीं थी। दूसरी ओर बेरोजगार भारतीय जनता नौकरी पाना चाहती थी और नौकरी के लिए डिग्री होना अनिवार्य था । परिणाम स्वरूप भारतीय समाज धीरे-धीरे अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था में आने लगी और डिग्रियां प्राप्त करके नौकरी पाने लगी । शिक्षा तंत्र का अंग्रेजी स्वरूप पैतृक ज्ञान, कला, हुनर आदि के महत्व को इस भारतीय समाज में शुन्य कर दिया । डिग्री धारी रटंत शिक्षित, कला विहीन, हुनर रहित लोगों का महत्व बढ़ा दिया । जिसके कारण अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था शिक्षा, कला, हुनर, नैतिकज्ञान, विज्ञान ,धार्मिक सनातन ज्ञान आदि में बाधक बनी ।
दुसरी ओर नौकरी पाने वाले विद्यार्थीयों का प्रचार प्रसार पूरे भारतवर्ष में पेपर के माध्यम से किया गया ताकि भारतीय लोग धीरे-धीरे अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था में आए । गुरुकुलों को, पुस्तकालयों को गुरुकुल के अध्यापकों को मारा गया, काटा गया, गुरुकुलों को जलाया गया ।
विज्ञान संकाय साइंस फैकेल्टी का हवाला देकर अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा दी गयी । साथ में यह भी कहा गया कि साइंस पढ़ना अंग्रेजी माध्यम में आसान है । आर्य समाज द्वारा 1885 में दयानंद आङ्ल वेद विद्यालय अर्थात् डीएवी खोला गया उसके बाद की जितनी भी विद्यालय खुली भारत में सारी की सारी अंग्रेजी में ही खुली।
अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने का मुख्य उद्धेश्य यह था कि भारतीय अपने मूल भाषा संस्कृत और हिंदी से दूर हो जाएं ताकि उनके अपने ग्रंथ जो उनकी भाषा में है वह उसे नहीं पढ़ पाए तथा अपने ज्ञान आध्यात्मिक, नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से वें दूर हो जाएं ताकि हम उन्हें जो पढ़ाएं उसे ही वह सही मानने लगे ।
अंग्रेजी माध्यम से दी गई शिक्षा में मूल रूप से कुछ विशेष बातें भारतीयों को बताई गई जैसे:- भारत के मूलनिवासी आर्य नहीं है ,आर्य समुदाय के लोग बाहर से आकर इस देश में बसे हैं ,भारतीय समाज पुरुष प्रधान समाज है । इस समाज में महिलाओं की अपनी कोई प्रधानता नहीं है, भारतीय समाज में महिला एक अबला है। भारतीय समाज जातियों में बटी हुई है ,जिसमें ब्राह्मण सबसे ऊंचे हैं और इन्होंने सब के साथ अत्याचार किया है, भारत में विज्ञान एवं तकनीकी नाम की कोई चीज नहीं है, विज्ञान के नाम पर जो भी कहां है । वह सब कुछ अंधविश्वास है , मांसाहार मानव का स्वभाविक भोज्य पदार्थ है । अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था में विशेष रूप से ईश्वर, आत्मा, मन एवं मन के दोष काम, क्रोध ,लोभ, मोह, ईर्ष्या, द्वेष आदि को तथा इन दोषों को दूर करने के उपाय कभी भी भारतीय जनता को नहीं पढ़ाया गया । ब्रह्मचर्य तथा ब्रह्मचारी से संबंधित ज्ञान नहीं दिया गया । अंग्रेजी पढ़ना, लिखना, बोलना, जूता, मोजा, टाई ,कोट पहनना नौकरी आदि करना इस देश में अच्छे लोगों की पहचान बन गई । जो गांव में रहते हैं। गांव के भेष-भुषा धारण करते हैं ,खेतों में काम करते हैं ,पशुओं की सेवा करते हैं । वे लोग नीच प्रवृत्ति के हैं , उनका विकास नहीं हुआ है , वह विकसित लोग नहीं है । जो नौकरी करते हैं, शहर में रहते हैं , ऐसी-कुलर में रहते हैं । आधुनिक संसाधनों को इकट्ठा करते हैं । वही विकसित हैं ।
मुस्लिम समुदाय में लड़का-लड़की के बीच विवाह नहीं होता। एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत उनमें साथ रहने की अनुमति दी जाती है । जो आपस में कभी पति-पत्नी नहीं होते । यूरोपीय संस्कृति में लड़का और लड़की एक साथ रहते हैं और कल अगर वह चाहे , किसी और के साथ रहना तो रह सकते हैं । पवित्र बंधन में बंधने की परंपरा हिंदू समुदाय में है । वे समझते हैं कि सात जन्मों का यह रिश्ता है । इसमें हमें जुड़ कर रहना चाहिए । यूरोप वासी इस परिवारिक सिस्टम को तोड़ना चाहा और आजकल मोबाइल यूट्यूब व्हाट्सएप फेसबुक के सहारे यह बात महिलाओं के दिल दिमाग में डाली जा रही है कि एक महिला सातों दिन बिना थके सुबह 4:00 बजे से लेकर रात को 10:00 बजे तक काम करती है । कभी भी उसको छुट्टी नहीं मिलता, पेंशन भी नहीं मिलता, फिर भी वह महिला काम करती है । इस तरह की भावनाएं महिलाओं के दिल में डाली जा रही है ताकि परिवार टूटे , परिवार संगठित न रहे ।
वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में भारतीय नई पीढ़ी को एक बात सिखाई गई । जो सबसे ज्यादा खतरनाक थी काम कोई भी करें उसमें फायदा जरूर होना चाहिए । बिन लाभ को देखे जो व्यक्ति काम करता है । वह मूर्ख है । परिणाम यह हुआ कि भारत में भारतीय जीवन शैली के अंतर्गत बहुत ऐसे धार्मिक अनुष्ठान है । जिसको हम अपने जीवन में करते हैं और उन अनुष्ठानों में फायदा या लाभ देखने की प्रवृत्ति हमारी नहीं होती है । उन अनुष्ठानों के कारण हमारा शरीर, हमारा वातावरण, पर्यावरण यह सब कुछ शुद्ध पवित्र होता है । जिस से होने वाले लाभ तत्काल हमको नहीं दिखाई देते फिर भी हम उनको करते हैं लेकिन लाभ देख कर काम करने की प्रवृत्ति जो आज उत्पन्न हुई है इसके कारण कई तरह के प्राकृतिक एवं भौतिक भारतीय धार्मिक अनुष्ठान से हम धीरे-धीरे दूर होने लगे ।
काम में लाभ देखने की प्रवृत्ति ने हमें कृषि संबंधी कार्यों से , परिवार में माता-पिता की सेवा से, गोपालन आदि विभिन्न अलग- अलग कई कामों से हमें दूर कर दिया । परिणाम यह हुआ कि हम शारीरिक रूप से अस्वस्थ होने लगे और विभिन्न प्रकार की बीमारियां हमारे जीवन में आ गई आधुनिक शिक्षा व्यवस्था ने विभिन्न प्रकार से भारतीय समाज को तोड़ने का कार्य किया ।।
शेष क्रमश:- आगे
उत्तम प्रकाश
वैदिक सुप्रभात
चलभाष:- 9416044828
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