लोकतंत्र में राजतंत्र Monarchy in democracy भाग-7
-:ओ३म्:-
लोकतंत्र में राजतंत्र भाग-7
"इंडियन पुलिस एक्ट"
1857 के संग्राम में कंपनी सरकार बहुत बुरी तरह पिट चुकी थी । इस संग्राम की सबसे मुख्य और विशेष बात यह थी कि इसमें संपूर्ण भारत एकजुट होकर चाहे वह राजा हो या महाराजा , हिंदू हो या मुस्लिम मतलब भारतीय समाज का प्रत्येक वर्ग कंपनी सरकार को उखाड़ कर फेंक देना चाहती थी । कंपनी सरकार को दांतो तले लोहे के चने चबाने पड़े थे ।
1857 के युद्ध का मूल कारण धार्मिक आघात था । जो भारतीय जनमानस सहन नहीं कर पाई । 1857 के युद्ध से पहले इस देश में कोई भी व्यक्ति अपनी सुरक्षा के लिए खुद से हथियार बना सकता था, खरीद सकता था, रख सकता था और अपनी रक्षा खुद कर सकता था । मतलब राजाओं के राज्य में व्यक्ति अपनी रक्षा स्वयं कर सकता था । इसके लिए वह युद्ध कला भी स्वच्छंद रूप से सीखने के लिए स्वतंत्र था ।
अब रानी सरकार के द्वारा एक भ्रम इस देश में फैलाया गया । हथियार बनाना और हथियार रखना यह दोनों ही गैरकानूनी है । देश के हर नागरिक की सुरक्षा की जिम्मेवारी सरकार की होती है । आम आदमी अपनी सुरक्षा स्वयं नहीं कर सकता । इसके लिए उसको सरकार पर निर्भर होना चाहिए । अगर कोई किसी विशेष कारण से हथियार रखना चाहता है तो सरकार से अनुज्ञप्ति ( लाइसेंस ) लेनी होगी ।
मतलब अब भारतीय जनता नपुंसक बने और नपुंसक बनने में अपने आप को गौरवशाली महसूस करें। उसके साथ हो रहे अन्याय को वह केवल सत्याग्रह के मार्ग से ही प्रदर्शित करे और न्याय को सत्याग्रह के मार्ग से ही प्राप्त करें । यही मानवता है यही इंसान होने की सच्ची पहचान है । इस देश में गौतम बुद्ध ने यही कहा है अहिंसा परमो धर्मः ।
सौभाग्य से अंग्रेजों को अफ्रीका में भारतीय नस्ल के काले अंग्रेज जो अंग्रेजी व्यवस्था से ही अपनी शिक्षा दीक्षा पूरी की थी । मिल गए जिन्हें बाद में बापू कहा गया। जो भारत आकर पूरी जिंदगी भारतीयों को सत्याग्रह के लिए प्रेरित करते रहे । मुझे एक बात आज तक समझ में नहीं आई । उनके हाथ में एक ग्रंथ दिखाई देता है । जिसे गीता कहते हैं उस गीता को सुनकर अर्जुन महाभारत के युद्ध लड़े । पर उसी गीता को पढ़कर वे हमें अहिंसा का मार्ग दिखाते रहे । उन्हें यह बात कभी समझ में नहीं आई शायद "न्याय को न्याय के मार्ग से पाना कभी भी हिंसा नहीं होता" ।
हालांकि अंत में उन्हें भारतीय होने का गर्व भी था ।
जाने अनजाने महात्मा जी अंग्रेजों की सहायता ही करते रहे , पूरी जिंदगी और भारतीय जनता भ्रम में जीती रही ।
भारतीय आम जनता 1857 की लड़ाई इसलिए लड़ पायी क्योंकि उनके पास पैसा था । रानी सरकार ने विभिन्न प्रकार के कर ( टैक्स ) लगाकर उन पैसों को वसुलना प्रारंभ किया ताकि भारतीय जनता के पास पैसा ही न बचे, युद्ध करने के लिए ।
1857 के युद्ध के बाद भारत की संपूर्ण प्राकृतिक संपत्ति को सरकारी घोषित कर दिया गया । ताकि आम जनता रोजगार के दृष्टिकोण से दरिद्र हो जाए । दरिद्र जनता सबसे पहले अपना पेट भरना चाहती है तब उसको राष्ट्र और धर्म दिखाई देता है । भारत की संपूर्ण प्राकृतिक संपत्ति जो ब्रिटेन सरकार ने अपना बना लिया था । उसे लूट पर ब्रिटेन ले जाना था इसके लिए उन्होंने विभिन्न अलग-अलग प्रकार के विभाग बनाएं । कच्चे मालों को ढोने के लिए ट्रेन का विस्तार बहुत तेजी से किया । इसके लिए भारतीय जनता से भूमि अधिग्रहण कानून के तहत बिन मुआवजा दिए भूमि ली गई ।
ऊपर लिखि संपूर्ण व्यवस्था ठीक-ठाक से चल पाए, समय आने पर भारतीय जनता को नियंत्रित की जा सके, किसी प्रकार के आक्रोश या आंदोलन को दबाया जा सके, ब्रिटेन सरकार अच्छी तरह शासन कर पाए इसके लिए उन्होंने "इंडियन पुलिस एक्ट" बनाया ।
और भारतीय जनता को हवाला दिया गया कि यह आप की सुरक्षा के लिए बनाई गई है ।
इंडियन पुलिस एक्ट को इस देश में केवल इसी दृष्टिकोण से लाई गई ताकि जिससे सरकारी तंत्र को ठीक-ठाक ढंग से इस देश में संचालित की जा सके । पुलिस आम जनता की सेवा नहीं करती । जबकि उपयुक्त संपूर्ण तंत्र के संचालन के लिए आम जनता से ही टैक्स ली जाती है ।
लाला लाजपत राय की हत्या इंडियन पुलिस एक्ट के कारण ही हुई थी । आधुनिक समय कि अगर मैं बात करूं तो कश्मीर में 19 जनवरी 1990 में हुई घटना कश्मीर कांड जिसमें लाखों हिन्दुओं को कश्मीर से निकाल दिया गया । पुलिस कुछ भी नहीं कर पाई। इस प्रकार के अनेकों कांड इस देश में होते रहते हैं । अब हम उसके आदी हो चुके हैं और हम सभ्य नागरिक होने का प्रमाण भी प्रस्तुत करते रहते हैं । वर्तमान में पूरे देश में लोकडाउन चल रहा है । इसी लॉकडाउन के क्रम में चुनाव भी हो रहे हैं । पुलिस का भरपूर प्रयोग केंद्र एवं राज्य सरकार कर रही है ।
मतलब यह है , गुलामों को न्याय पाने का अधिकार नहीं होता । राजा को अनुकूल लगे तो न्याय करें अन्यथा न करें । गुलाम को चुपचाप सहन कर ही लेना चाहिए ।
शेष क्रमशः- आगे
उत्तम प्रकाश
वैदिक सुप्रभात
94 16044 828
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