"आओ हम सब गुलाम बने" भाग-3
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था को बल देने के लिए बैंकों का निर्माण हो चुका था। अब इन बैंकों में पूजी का एकीकरण होने लगा। पूजी का प्रयोग कहां हो इसके लिए औद्योगिक क्रांति शुरू हुआ। औद्योगिक क्रांति के लिए पूंजी निवेश अनिवार्य है इस पूंजी निवेश के लिए पूजी प्राप्त हो सके इसलिए बैंकों को लाया गया भारत शुरू से ही उद्योग प्रधान देश रहा है। भारत का उद्योग पशुओं और मनुष्यों पर आधारित था लेकिन अब मशीनी कल कारखानों का प्रयोग करना था इसलिए पूजी चाहिए थी और भारत की मनुष्यों और पशुओं पर आधारित उद्योगों को बंद करना था इसलिए भारत में प्रचार किया गया कि भारत कृषि प्रधान देश है भारत में कृषि व्यवहारिक जीवन पद्धति है लोगों को इससे बाहर निकालकर उद्योगों में लगाना था इसलिए भारत को कृषि प्रधान देश कहना जरूरी था ताकि लोग धीरे-धीरे उद्योगों की ओर अग्रसर हो और ब्रिटेन से लाई गई उद्योग भारत में फल फूल सके। उद्योगों को संचालित करने के लिए जमीन की जरूरत थी इसलिए रानी का सरकार बनने के बाद, भारत में भूमि अधिग्रहण कानून बनाया गया। इंडियन फॉरेस्ट एक्ट, जंगल को सरकारी घोषित किया गया तथा भारत के खनिज तत्व को भी सरकारी घोषित कर दिया गया मतलब यह सरकार का है अर्थात् भारत में प्राकृतिक जो कुछ भी है वह सब ब्रिटिश सरकार का है इस कानून के आने के बाद आम जनता बगावत कर सकती थी इसलिए इंडियन पुलिस एक्ट लाया गया। जो आपके अपने अधीनस्थ करके सरकारी कानूनों को लागू करने में सरकार का सहयोग करे। आम जनता न हथियार रख सकती है और न ही बना सकती है। सरकारी अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) के बाद हथियार रखने का अधिकार प्राप्त होने लगा। मतलब सरकार को यह पता होना चाहिए कि हथियार किसके पास है। जो बिन अनुज्ञप्ति का हथियार रखता है वह इंसान गलत है परंतु जिन प्राकृतिक संपत्तियों पर भारतीयों का पिछले कई हजार साल से स्वामीत्व था जिसे राजा भी अपना नहीं कह सकता था। राजा का काम उन प्राकृतिक संसाधनों संपत्तियों का रक्षा करना था उसको सरकारी कानून का हवाला देकर ब्रिटिश सरकार ने सरकारी घोषित कर दिया यह कहां तक उचित था ? मतलब आम जनता उसे छू भी नहीं सकती थी अगर छूती है तो उसको जेल हो जाएगा परिणाम यह हुआ कि जो लोग इन जंगलों पर, खनिज तत्वों पर तथा कृषि पर आधारित थे वें सभी के सभी रातों-रात बेघर हो गए, बेरोजगार हो गए। फिर ब्रिटिश सरकार ने कहा कि हम तुम्हें रोजगार देंगे तुम अंग्रेजी पढ़ो इस प्रकार आधुनिक उद्योगों का प्रारंभ जो मशीनों पर आधारित था उसका सूत्रपात भारत किया गया।
अंग्रेजी पढ़ाने के लिए तथा उन्हें भारतीय जनता को अधिनस्थ करना था इसके लिए भारत में शिक्षा प्रणाली प्रारंभ किया गया और भारतीय गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली को ध्वस्त किया गया सरकार के द्वारा जो जो कानून बनाए गए थे उन सभी कानूनों को पालन करने के लिए विभिन्न अलग-अलग प्रकार के विभाग बनाए गए उन विभागों में नौकरी देना शुरू कर दिया गया और नौकरियों में आरक्षण देने के प्रावधान लाए गए। परिणाम यह हुआ कि भारत धीरे-धीरे बड़ी-बड़ी कंपनियों का गुलाम होता चला गया और भारत की पारंपरिक जो रोजगार व्यवस्था थी जो पिछले कई हजार सालों से चलती आ रही थी ध्वस्त होता चला गया।
फलत : पूरे विश्व पटल पर जो आप आधुनिक विकास देख रहे हैं उसका मूलाधार आर्थिक तंत्र एवं बैंकिंग सिस्टम है विज्ञान का स्वरूप आज जितना है इससे भी ज्यादा कहीं पहले था परंतु उसका प्रयोग कभी भी तकनीकी बनाने के लिए नहीं किया गया क्यों ? क्योंकि पुजी का एकीकरण नहीं हुआ था । पुजी का एकीकरण होने से उद्योगों को बल मिला और उन्होंने विज्ञान का प्रयोग करके विभिन्न प्रकार के कल कारखाने और मशीनों को बनाया और पारंपरिक रोजगार को उन्होंने समाप्त किया मतलब स्पष्ट है कि आधुनिक संपूर्ण विकास का श्रेय विज्ञान को न जाकर अर्थव्यवस्था को एवं बैंकिंग सिस्टम को जाता है ।
भारतीय अर्थव्यवस्था में ग्राहक को देवता माना जाता है और यहां अर्थव्यवस्था का एक मूल सिद्धांत है, लाभ हमेशा शुभ होना चाहिए अर्थात् "शुभ-लाभ" लाभ कभी भी अशुभ न हो । परंतु आधुनिक अर्थव्यवस्था में आप ग्राहक को जितना बेवकूफ बना दे उतने अच्छे व्यापारी माने जाते हैं भला ऐसा क्यों न हो, क्योंकि व्यापार ही बैंकों से कर्ज लेकर के शुरू किया गया है तो बाजार में सामान का बिकना जरूरी है अगर नहीं बिका तो लोन चुकता नहीं होगा। लोन चुकता नहीं होगा तो आप दिवालिया हो जाएंगे। इसीलिए साम-दाम-दंड-भेद किसी तरह से भी सामान को बेचना जरूरी है। इसके लिए चाहे आप ग्राहक को बेवकूफ ही क्यों बनाते हो। इस अर्थव्यवस्था में आप न्याय-अन्याय,हिंसा-अहिंसा,नैतिकता और अनैतिकता किसी को भी पैमाना नहीं बना सकते।
उदाहरण के लिए बाजार में हजारों कम्पनियां अपने खाद्य पदार्थों की शुद्धता की गारंटी देती हुई मिल जाएंगी, आखिर गारंटी की जरूरत क्यों पड़ी ?
शेष क्रमश: आगे
वैदिक सुप्रभात
उत्तम प्रकाश
9416044828
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