आओ हम सब गुलाम बने
प्राचीन समय में वस्तुओं का विनिमय एक दूसरे के साथ व्यापार के लिए वस्तुओं से ही होता था । उस समय सोने के सिक्के का प्रयोग अशर्फी के रूप में वस्तु विनिमय हेतु होता था । समय के साथ कुछ परिवर्तन हुआ दुनिया के विभिन्न अलग-अलग राष्ट्र अपने कोष में सोना रखकर मुद्राओं को छापना प्रारंभ किया । उन कागज की मुद्राओं पर लिखा गया कि "मैं धारक को इतना रुपया अदा करने का वचन देता हूं"। मतलब यह है कि जो राष्ट्र जितना मुद्रा छापती है । उतने ही मुद्रे के मूल्य का सोना उसके कोष में रखा हुआ होता है ।
ब्रिटेन दुनिया के विभिन्न देशों पर अपना सम्राज्य स्थापित किया । जिन - जिन देशों को ब्रिटेन स्वतंत्र करता गया उन सभी देशों में डेमोक्रेटिक सिस्टम अर्थात लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू करता गया ।
अपने देश भारत की मैं अगर बात करूं तो अगर आप भारत के नागरिक हैं । किसी सरकारी नौकरी में नहीं है तो , अगर जनता चाहे तो आपको चुन कर लोकसभा या विधानसभा में भेज सकती है । आप की शिक्षा , आपका गुण- धर्म आदि किसी प्रकार का कोई विशेष शर्त नहीं है । आप सबसे बड़े लोकतंत्र के संचालक हो सकते हैं । मतलब यह है की एक अशिक्षित , असभ्य जिसने भारत के किसी भी शिक्षा तंत्र में अर्थात् गुरुकुल आदि कहीं भी पढ़ाई न किया हो फिर भी वह शिक्षा मंत्री बन सकता है ।
दुनिया के विभिन्न देशों में विभिन्न प्रकार के अलग-अलग बैंक है । जैसे एक बैंक स्विट्ज़रलैंड में है । इसको स्विच बैंक कहा जाता है । इन बैंकों में दुनिया के किसी भी कोने से कोई भी व्यक्ति अपना पैसा जमा कर सकता है । जिसके लिए पैसा धारकों को "कर" भी देना पड़ता है ।
मतलब यह है कि आप लोकतंत्र में नेता बने । नेता बनने के बाद घोटाला करें और उस पैसा को इन बैंकों में जमा कर दे ।
बस मेरा सवाल इतना है कि आधि दुनिया में लोकतांत्रिक व्यवस्था ब्रिटेन के द्वारा लाई गई पर ब्रिटेन का राजतंत्र अभी भी समाप्त नहीं हुआ है क्यों ?
और भला ऐसा हो क्यों न हो शेर तो यही चाहता है न कि जंगल में मैं अकेला रहु । अगर ब्रिटेन में ऐसा सोच लिया तो क्या बुरा किया ।
बहुत छोटा सा देश है ब्रिटेन , अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा तंत्र भी उसके पास नहीं है । फिर भी उसकी मुद्रा पाउंड का वैल्यु कभी भी कम नहीं होता क्यों ?
इस विषय पर विचार करना चाहिए ।
मतलब ये है कि आपके देश का पैसा बहुत आसानी से उन बैंकों में जा रहा है । पंचवर्षीय योजनाओं के नाम पर आप हर बार वहां से कर्ज लेकर आ रहे हैं । जब-जब आप वहां से कर्ज लेकर आते हैं विश्व बैंक से तब-तब आपको अपनी मुद्रा का अवमुल्यन अर्थात् मुद्रा का वैल्यु अंतराष्ट्रीय मार्केट में कम करना पड़ता है । और इतना ही नहीं जहां से आप कर्ज लेकर आते हैं । वें अपने मनचाहा तरीके से आपके देश की हर व्यवस्थाओं को अपने हाथ पर नचाते हैं । यही कारण है कि हमारे यहां विभिन्न प्रकार की लघु उद्योग धीरे-धीरे समाप्त होते चले गए और बड़ी-बड़ी कंपनियां लघु उद्योगों में उत्पादित वस्तुओं का निर्माण करने लगी परिणाम यह हुआ कि आपके देश की लघु उद्योग धीरे-धीरे समाप्त होने लगे और बेरोजगारों के बहुत बड़ी फौज खाड़ी हो गई ।
अब मूल बात यह है कि देश आपका , देश का संसाधन आपका , देश की मुद्रा आपकी पर उस मुद्रे का मूल्यांकन आप तय नहीं कर सकते। अब दूसरी बात यह है कि जो आपके मुंद्रा का मूल्यांकन करते हैं उनके पास सदा से संसाधनों का आभाव ही रहा है ।
आपके अपेक्षाकृत उनके मुद्रा का मूल्यांकन ( वैल्यु ) बहुत अधिक है । परिणाम स्वरुप बहुत कम ही मुद्रा दे कर के आपके यहां की बहुत अधिक संसाधन को बहुत आसानी से वें प्राप्त कर लेते हैं ।
मतलब यह है कि वें अपने ही घर में बैठकर आपके रुपया का मूल्यांकन करते हैं और आप दिन - रात मेहनत करके संसाधनों को उनके घर तक आसानी से पहुंचा देते हैं । वें आपको आपके ही घर में गुलाम बना रखें है ।
हम आधुनिक बनना चाहते थे उनके रास्ते चलकर । हमने अपने संसाधनों से, अपना मार्ग ,अपने तकनीकी के आधार पर नहीं बनाया । हमने सब कुछ खोया सभ्यता भी ,संस्कृति भी , भाषा भी , मर्यादाओं को भी, नैतिकता भी, परिवार भी ,स्वास्थ भी खोया , अब संसाधन भी खो रहे हैं । आगे अभी बहुत कुछ खोना बाकी है । क्योंकि अब मुद्रा भी हट जाएगा । डिजिटल इंडिया बन रहा है । और पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल दुनिया होने से पहले हर भारतीय को कर्ज लेने का आदि बनाया गया हैं । होम लोन, एजुकेशन लोन, व्यपार लोन , कृषि लोन , कार लोन आदि लोन ही लोन ।
मतलब ये है कि हम सभी लोन लेने के आदी हो चुके है और वर्तमान में आप देख रहे हैं कि मोबाइल से खूब लोन लिए जा रहे हैं । अब जब हर भारतीय कर्जखोर हो तो स्वतंत्रता किस बात की ।
मतलब सरकार भी कर्जखोर और सरकार की जनता भी कर्जखोर ।
मित्रों ध्यान रखना कर्ज लेने वाला व्यक्ति कभी सर उठाकर नहीं जीता ।
गजब की तरक्की की हमने पिछले कुछ वर्षों में ।
उत्तम प्रकाश
वैदिक सुप्रभात
94 16044 828
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