अनपढ़ सासू मां

अनपढ़ सासू मां


मैं रो रही थी, तभी मम्मी रूम में आ गई मम्मी ने पूछा क्या हो गया मैंने झूठ बोल दी। मैं बोली पेट दर्द कर रहा है। मम्मी ने कहा डॉक्टर के पास चलो, मैंने मना कर दिया। 

         बात यूं थी कि आज मेरी शादी की तीसरी सालगिरह थी मेरी सासू मां आज मुझे वापस ले जाने के लिए मेरे घर आई थी ताकि मनाकर मुझें ले जा सके। जबकि तलाक हो चुका है। पर संयोग बस मम्मी और मेरी बुआ दोनों घर पर थी और दोनों ने उनकी बेइज्जती कर घर से भेज दिया। सासू मां लौटते समय एक बार ऊपर देखी, खिड़की पर मैं उनको दिख गई। उनका मन दुखी था और आंखों में आंसू, मुझसे गलति यह हुई कि मैं खिड़की बंद कर दी। मुझे लगता है कि यह मेरी सबसे बड़ी गलती थी। आज मुझे अपने सासू मां के साथ खड़े होने चाहिए थे जब मम्मी और बुआ उनकी बेइज्जती कर रही थी। 

              मेरा नाम प्रीया और मैं अपने ही क्लास के एक लड़के से प्रेम करती थी। आधुनिक जमाना है हम दोनों के पास मोबाइल था हम एक दूसरे से बात करते। कब प्रेम हो गया पता ही नहीं चला। घर वाले भी तैयार हो गए और हमारी शादी हो गई। हालांकि मैं नॉनवेज खाती थी जबकि सुदीप के घर वाले शुद्ध वेजीटेरियन थे। यह जानते हुए कि मैं नॉनवेज खाती हूं उसके घर वालों ने मुझे अपना लिया लेकिन शर्त एक ही था मुझे नॉनवेज छोड़ना होगा। मैं भी छोड़ने को तैयार थी और मैंने छोड़ भी दिया था। मेरे भैया और भाभी इस संबंध से बहुत खुश थे और सुदीप को बहुत मानते थे। शादी के कुछ दिन बाद तक मैंने सुदीप से नॉनवेज खाने की इच्छा जताई तो वह मुझे होटल में ले जाकर खिला देता। यह बात मेरे ससुराल वालों को नहीं पता था। फिर बाद में मैंने डिसाइड किया कि अब मुझे आगे नहीं खाना है। लेकिन मेरी मम्मी को नॉनवेज बहुत पसंद है इसलिए वह सुदीप से मेरा शादी करना भी नहीं चाहती थी। मेरे घर से मेरा ससुराल ज्यादा दूर नहीं है। मैं जब भी अपने मायके जाती तो मुझे नॉनवेज खाना पड़ता था मम्मी की ज़िद पर और बुआ उसमें झौंक लगा देती थी। 

            मुझे अपने डिग्री का बहुत घमंड था। मैं शहर के रहने वाली थी और सुदीप गांव से। मेरी सासू मां का स्कूली शिक्षा नहीं हुआ था। लिखना पढ़ना नहीं जानती थी। मैं ससुराल में अपनी सासू मां को कभी भाव नहीं देती थी। मेरी सासू मां परंपराओं के निर्वहान में, देवी देवताओं के पूजा-पाठ में, व्रत- त्यौहार उपवास आदि में एक बहू को ससुराल में कैसे रहना चाहिए इसका वह ध्यान रखती। कुछ भी कहो मुझे बहुत मानती थी। मेरा ध्यान रखती थी। उनके बताए गए सारे परंपरा मुझे बकवास लगते। सासू मां को मुझ पर इस बात की उम्मीद थी कि आधुनिक लड़की है धीरे-धीरे बदल जाएगी। एक बार मेरे सर में दर्द हो रहा था और मैं उनसे बोल दी । वों सरसों का तेल लाकर मेरे सर पर डाल दीं। मेरे हिसाब से वह बहुत ज्यादा था। मैं गुस्से से लाल पीली हो गई। बाद में उन्होंने मेरा सर भी दबाया। उनके डाट में कहीं न कहीं प्यार था। आज मुझे ऐसा लगता है। लेकिन मेरा बर्ताव उनके प्रति हमेशा रूखापन का ही रहा। कारण एक और था मैं प्रतिदिन अपनी मम्मी और बुआ से फोन पर बातें करती। जो मेरी सासू मां को अच्छा नहीं लगता था। फिर भी मुझे कुछ बोलती नहीं थी। 

          घर में पैसे की कोई कमी नहीं थी सुदीप की सैलरी बहुत अच्छी थी। उसने एक नया फ्लैट लेने का प्लान किया। मैंने यह बात अपनी मम्मी को बता दी। फिर क्या था । वह हुआ जो नहीं होना था। मेरी मम्मी ने कहा कि जो फ्लैट सुदीप खरीद रहा है वह तुम्हारा नाम पर होना चाहिए मैंने यह बात सुदीप से कहीं सुदीप ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया। यह बात मेरे भैया को पता चला। भैया ने मम्मी को समझने की कोशिश की यह उनके घर का मैटर है हमें कुछ नहीं बोलना चाहिए। मेरी मां ने सुदीप को घर बुलाया और सुदीप से बोला कि जो फ्लैट तुम खरीद रहे हो वह मेरी बेटी के नाम से होना चाहिए। सुदीप को यह बात बहुत बुरी लगी। उसने मुझे नहीं बताया कि मेरी मम्मी ने उससे क्या कहा थी। मेरे नाम से फ्लैट हो इसकी चर्चा मैंने सुदीप से दोबारा नहीं। मेरी मम्मी ने मुझे एक दिन घर पर बुलाया मैंने जाने के लिए सुदीप से कहा। सुदीप ने साफ मना कर दिया। मम्मी के कहने पर मैं जिद करने लगी। मेरी सासू मां को इस विषय में कुछ पता नहीं था कि फ्लैट खरीदने की तैयारी हो रही है और वह किसके नाम से होगी। हम दोनों पति-पत्नी में नोंक-झोंक हो गया। मैं मम्मी के पास जाना चाहती थी और सुदीप को समझ में आ रहा था कि मेरी मम्मी मुझे क्यों बुला रही है। सुदीप का प्लान था अभी जिस फ्लैट में रह रहे थे उसे बेचकर दूसरा लेने था। 

           मेरी मम्मी जिद पर अड़ गई। फ्लैट मेरे नाम पर ही होना चाहिए । दोपहर का समय था सुदीप अपने कार्यालय में था और मेरी मम्मी बहाने से मुझे घर ले गई। घर पहुंचते ही मम्मी ने मुझे बहुत उल्टा सीधा समझाया। मैं ना समझ थी अपनी ही मम्मी के बातों में आ गई। समय मिलते ही भाभी ने मुझे समझाया तुम्हारा घर टूट जाएगा, तुम बिखर जाओगी, दुनिया में कोई तुम्हारा साथ नहीं देगा, पहुना जो कर रहे हैं वह ठीक है अपने पति का साथ दो मम्मी के बातों में मत आओ। कुछ देर में बुआ भी आ गई। बुआ ने आग में घी डाला और मैं आग बबूला हो गई तभी सुदीप घर आ गया। उसने मुझे बहुत समझाने की कोशिश की और घर चलने के लिए कहा। मैंने साफ-साफ कह दिया अब फ्लैट मेरे नाम से ही होगा तभी मैं उस घर में वापस जाऊंगी। सुदीप के लाख समझाने पर भी मैं समझ नहीं पाई मैं घर वापस नहीं गई। हालांकि मेरी सासू मां के मरते ही फ्लैट हम दोनों नाम स्वत: ही हो जाते। 

          अगले कई महीनों तक सुदीप मेरे घर आता रहा, मुझे समझता रहा, कई बहाने बनाता रहा, बीच में सासू मां भी घर आई मुझे ले जाने के लिए पर मैं एक न सुनी किसी की। मेरे दिल में कई बार यह विचार आते कि घर के झंझट में रिश्ते टूट रहे हैं मुझे अपने घर चले जाने चाहिए लेकिन मेरे सामने मेरी मम्मी और मेरी बुआ खड़ी थी मैं अपने दिल की आवाज़ को सुनने का प्रयास ही नहीं किया। सुदीप का मेरे घर आना- जाना भी अब कम हो गया, समझना समझाना भी कम हो गया, अब मोबाईल कि घंटियां भी नहीं बजती। 

             एक दिन अचानक पता लगा कि मेरी सासू मां का तबीयत ठीक नहीं है। मैं उनसे मिलना चाहती थी। मुझे उनकी बहुत याद आ रही थी। लेकिन मेरी मम्मी ने एक नहीं सुनी मैंने उससे कहा कि चलते हैं एक बार देख कर आते हैं। मम्मी ने कहा बना बनाया खेल तुम खराब कर दोगी। अब तुम्हारे नाम फ्लैट हो ही जाएगा परेशान होकर सुदीप को करना ही पड़ेगा। 

          अगर मैं सासू मां से मिलने चली जाती तो सब कुछ शायद ठीक हो जाता पर ऐसा हो नहीं पाया और सुदीप को यह बात बहुत बुरी लगी। सुदीप के लिए उसकी मां ही सब कुछ थी क्योंकि मेरे ससुर जी तो बचपन में ही गुजर चुके थे। मैं चुपके से भाभी के साथ सासू मां से मिलने का प्लान कर रही थी पर किसी तरह मां को पता चल गया। मेरी भाभी का घर टूट न जाए इसलिए मैं डर गई और सासू मां से मिलने का ख्याल दिल से उतार दी। 

         आज रिक्शा पर एक बूढी महिला को देखकर मुझे अपनी सासू मां की याद आ गई आंख में अचानक आंसू आ गए। 

          सासू मां की बेज्जती सुदीप को सहा नहीं गया मां ने जो तलाक के कागज भेजे थे उस पर साइन होकर आ गया। एक दिन पंडित जी मेरे घर पर आए थे जिन्होंने हमारी शादी करवाई थी। परंतु मम्मी ने मिलने नहीं दिया शायद वह मुझे समझाने ही आए थे। मैं जो नहीं चाहती थी और मां जो चाहती थी वह हो गया । तलाक हो गई सुदीप वह फ्लैट मेरे नाम कर गया। पर पता नहीं अब कहां है ? उसके नंबर भी बंद आते हैं शायद उसने नंबर बदल दिया। मैंने सुना है कि अब उसकी दूसरी शादी होगी शायद एक बच्चा भी है। लेकिन वह मेरी जिंदगी से बहुत दूर और इस शहर से भी बहुत दूर कहीं और है शायद। बहुत खुश भी होगा। सोशल मीडिया पर वह कभी भी एक्टिव नहीं रहा उस समय भी उसकी उतनी रुचि नहीं थी और अब तो होगी भी नहीं । हालांकि फेसबुक आदि पर मैंने कई बार खोजने की कोशिश की पर वह कभी नहीं मिला। अगर मेरे पापा जिंदा होते तो शायद यह सब कुछ नहीं होता मेरा घर नहीं टूटता पापा मम्मी और बुआ दोनों को संभाल लेते और मैं आज सुदीप के साथ बहुत खुश होती भैया ने बहुत चाहा कि रिश्ता न टूटे परंतु मम्मी के सामने भैया की एक न चली। सुदीप का दिया हुआ फ्लैट मेरे पास है, उसने बहुत सारे पैसे मेरे नाम कर गए,  पैसे की कोई कमी नहीं है पीछे भी पैसे की कभी कोई कमी नहीं रही मेरे जीवन में पर इस पैसे ने मुझे जीना नहीं सिखाया, रिश्तों को संभालना नहीं सिखाया। आज सुदीप का दिया हुआ यह घर मुझे काटने को दौड़ता है। मैं अपने सासू मां की बताई हुई सभी परंपराओं को पूरे तहे दिल से पालन करती हुं, खूब पूजा-पाठ करती हूं, व्रत त्योहार भी रखती हूं, मंदिर भी जाती हूं, पर घर में अकेली हूं। अब मेरे भैया भाभी भी मेरी इज्जत नहीं करते, मां बुढ़ी थी वह भी चली गई। बुआ को लगता है कि उनसे कुछ गलती हुई है वो नहीं आती मेरे पास। मेरा कोई बच्चा भी नहीं है। मुझसे अब कोई शादी नहीं करना चाहता है। 

         नरक हो गया है यह मेरा जीवन मेरी बुआ की व्यवहार को देखकर आज मेरी भाभी भी मेरे भतीजे को मुझसे दूर रखती है। 

         जब अपनी मती मारी जाए तो सामने वाले का सही सलाह भी बुरा लगता है। ‌मेरी भाभी और भैया ने मुझे बहुत समझाया पर मैं किसी की नहीं सुनी। 

        व्यक्ति अपने दुख का स्वामी खुद होता है। मैंने अपने हंसते खेलते परिवार को खुद डूबोया है। सच में सुदीप जहां भी होगा मुझे बहुत याद करता होगा। पर मेरी अना ने उसको मुझसे दूर कर दिया।



वैदिक सुप्रभात 

उत्तम प्रकाश 

9416044828



             

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