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लोकतंत्र में राजतंत्र Monarchy in democracy ("भारतीय रेल") भाग-6

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  -:ओ३म्:-            लोकतंत्र में राजतंत्र ("भारतीय रेल") भाग-6              "भारतीय रेल"                      मित्रों आज 16 अप्रैल है आज ही के दिन 1853 में ब्रिटिश रेल का प्रारंभ भारत में हुआ था । भारत में रेल आए इसका मूल उद्देश्य यह नहीं था कि भारतीयों के आवागमन में सुविधा हो सके । बल्कि यह रेलवे इसलिए लाई गई थी ताकि रेल के माध्यम से भारत के विभिन्न इलाकों से अधिक से अधिक कच्चे माल को बंदरगाह तक पहुंचाया जा सके एवं ब्रिटेन में उत्पादित सामानों को भारत के विभिन्न इलाकों तक पहुंचाया जाए । ब्रिटिश व्यापार का बहुत तेजी से विस्तार हो सके तथा ब्रिटिश सेना को भारत के विभिन्न इलाकों तक पहुंचा कर भारत को अच्छी तरह से गुलाम बनाया जा सके । हालांकि वह भारत को कभी भी गुलाम नहीं बना पाए अंत में छोड़कर जाना ही पड़ा । रेल के विस्तार के लिए ब्रिटिश सरकार को जमीनों की आवश्यकता थी । इसके लिए उन्होंने भूमि अधिग्रहण कानून लाया । रेल के विस्तार के लिए भारतीय किसानों से जो जमीन ली ग...

लोकतंत्र में राजतंत्र भाग-21 ("फूट डालो राज करो" भाग-5)

आपके मन में यह सवाल उत्पन्न होता होगा कि अगर भारतीय समाज जातिगत व्यवस्था में नहीं बटी हुई है तो वर्तमान में विभिन्न अलग-अलग प्रकार के सरनेम क्यों लगाए जाते हैं किसी के नाम के पीछे चौधरी, ठाकुर, मिश्रा, तिवारी, चौरसिया, बरनवाल, सिंह,ओझा,झा,उपाध्याय,शर्मा, अग्रवाल, राय, सोनी, कादयान, साहनी,पटेल, राणा आदि अलग-अलग प्रकार के सरनेम क्यों लगाए जाते हैं ।       किसी भी सभ्यता संस्कृति के बहुत लंबे समय तक टिके रहने के दो कारण हो सकते है । उसका अपना आर्थिक तंत्र और उसका अपना दर्शन जो न्याय पर आधारित हो ।               यहां हम आर्थिक तंत्र पर विचार करेंगे ।           भारतीय आर्थिक व्यवस्था बिल्कुल सहज , सरल और आसान है । अगर कोई व्यक्ति किसी विशेष प्रकार का कला या कारीगरी जानता है । वह प्रकृति से कच्चा माल प्राप्त करके किसी विशेष तकनीकी के माध्यम से कुछ विशेष संसाधन बना सकता है । वह इस कला को किसी भी व्यक्ति को आसानी से सिखा सकता है ।  ...

संबंध

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                              -:ओ३म्ः-                               "संबंध"                         भाग-1 संबंध या रिस्ते तीन प्रकार के होते हैं। आत्मा का , मन का और शरीर का (रक्त का ) । आत्मीय संबंध सबसे सूक्ष्म है, उससे ज्यादा स्थुल संबंध मन का और सबसे ज्यादा स्थुल संबंध शरीर का होता है । सामान्य तौर पर हमें यह पता है कि सूक्ष्म पदार्थ अधिक शक्तिशाली होता है स्थूल पदार्थ के तुलना में । अर्थात आत्मीय संबंध सबसे ज्यादा मजबूत होता है उससे कम मजबूत मन का और उससे भी कम मजबूत शरीर का संबंध होता है । इन तीनों संबंधों के बीच का धागा प्रेम वाला होना चाहिए जो ईर्ष्या और द्वेष से परे हो । इन संबंधों के बीच लगी हुई गाँठ न्याय के आधार पर बंधी होनी चाहिए । सुचारु रुप से परिवार संचालन हेतु इन तीनों संबंधों पर विशेष रूप से ध्यान देनी चाहिए ।  वर्तमान समय में आज परिवार संचालन हेत...

लोकतंत्र में राजतंत्र Monarchy in democracy (भाग-10)

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     -:ओ३म्:- लोकतंत्र में राजतंत्र भाग-10                           भारत के  तत्कालीन संपूर्ण रियासतों को लोकतंत्र का हवाला देते हुए 1947 में प्रशस्ति पत्र बांट कर पूंजीवादी भारतीयों के लिए एक नये गणराज्य का स्वरूप  बना भारत ।                           15 अगस्त 1947 के बाद का भारत रियासत कालीन भारत नहीं था । अब यह भारत नेताओं का था । जिन्हें देश को अब गति देनी थी और प्रगति के मार्ग पर ले जाना था । अब इस भारत में प्रगति का मार्ग वह नहीं था जो रियासत कालीन था । विकास की नई परिभाषा गढ़ी गयी । विकास मतलब सड़क ,बिजली ,चिकित्सालय और स्कूल । मतलब हर गांव, हर शहर में यह होना ही चाहिए ।  अगर यह है तो वह क्षेत्र विकसित है अन्यथा नहीं ।                          यहां स्कूल का मतलब गुरुकुल से नहीं था । स्कूल का सीधा मतलब मैकाले द्वारा लाई गई शिक्षा व्यवस्था को अधिक से अधिक...

लोकतंत्र में राजतंत्र Monarchy in democracy भाग 15

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                                                                -:ओ३म्:-                                                                   लोकतंत्र में राजतंत्र (भाग 15)                                   ठीक उसी प्रकार पुरुष के अंदर बाहर से ग्रहण करने की प्रवृत्ति और महिला के अंदर स्वयं से त्यागने की प्रवृत्ति होती है । परिणाम स्वरूप महिला में अपने परिवार की खुशी के लिए, परिवार की शांति-अमन के लिए त्यागने की प्रवृत्ति होती है । अपने बेटा और पति के लिए सब कुछ त्यागने को तैयार होती है ।              आईये महिलाओं को समझते हैं । हालांकि इन्हें समझ प...

लोकतंत्र में राजतंत्र भाग -19( "फूट डालो राज करो" भाग 3)

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                                             भारतीय समाज को तोड़ने के जो प्रमुख कारण थे वह मैं पूर्व के लेखों में बता चुका हुँ ।         ब्रिटिश सरकार ने भारतीय समाज को तोड़ने का मुख आधार वर्ण व्यवस्था को बनाया । बाद में भारत सरकार ने विभिन्न प्रकार की जातिगत प्रमाण पत्र एवं आरक्षण आदि चीजों से उसे मजबूत किया ।           अब बारी है भारतीय परिवारिक व्यवस्था को कैसे विभक्त की जाए । इसके लिए ब्रिटिश सरकार ने विभिन्न आयामों को खड़ा किया जिससे एक ही परिवार के विभिन्न अलग-अलग सदस्यों में विवाद उत्पन्न हो सके । युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो सके, आपस में मारपीट हो सके और वे एक न हो सके इसकी व्यवस्था की गई ।                दूसरी ओर ब्रिटिश सरकार पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का पोशाक है अतः बड़ी-बड़ी कंपनियों को लगाने के लिए उन्हें जमीनों की जरूरत थी ।जमीन उन्हे...

अर्धनग्न समाज का कुतर्क

"अर्धनग्न समाज का कुतर्क" महिलाओं की एक शिकायत मर्दों से हमेशा रहती है । वें अपना सोच क्यों नहीं बदलते हमारे कपड़ों पर ही उनका ध्यान क्यों अटकता है ? मर्दों को अपनी सोच बदलनी चाहिए और अपनी नियत को साफ रखना चाहिए । ऐसा उपदेश अक्सर सुनने को मिलता है । आईए इस विषय पर थोड़ी बहुत चर्चा कर लेते हैं । बात सोच बदलने या नीयत को साफ करने की नहीं है । बात यहां मानवीय प्रवृत्ति , चेतनता का विकास एवं मनोविज्ञान को समझने की है । मेरी अगर आप सुनें तो इस विषय पर और गहराई से विचार करना चाहिए । मनुष्यों को छोड़कर दुनिया का कोई जीव ऐसा नहीं है जो वस्त्र पहनता हो । चुकी मनुष्य का विकास वर्तमान विज्ञान के कथानानुसार जानवरों से हुआ है । तो फिर मनुष्य के वस्त्र पहनने का क्या मतलब है ? और अपने देश भारत की कहें तो यहां पर एक सन्त हुए हैं । जिन्होंने कहा कि वस्त्र पाहनने की कोई जरूरत है ही नहीं है । यह स्वतंत्र वायु और आकाश ही हमारा वस्त्र है । अब हमारे संत ने ही हमें नंगे रहने का उपदेश दे दिया हो तो बेचारी इन अल्पबुद्धि वाली महिलाओं पर क्या दोषारोपण करें । और अब पश्चि...

लोकतंत्र में राजतंत्र Monarchy in democracy भाग 16

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-:ओ३म्:-                                                         लोकतंत्र में राजतंत्र ( भाग 16)                                                                                      पंचतंत्र में आया है कि दुनिया में तीन ऐसी चीजें है । जो दूसरे के आश्रय पर ही निर्भर रहती है । प्रथम शासक, राजा वह होता है जो अपने आसपास के लोगों से बहुत ज्यादा प्रभावित होता है। राजाओं के आसपास कुछ चापलूस होते हैं जो अक्सर अपना कार्य सिद्धि करने हेतु हमेशा राजा की बडा़ई करते रहते हैं और खूब ज्यादा बडा़ई करके वह अपना काम खूब निकालते भी है। राजा उनकी बातों में आकर विभिन्न कई प्रकार के कार्य करते रहते है अर्थात् वह अपनी वाहवाही सुनना बहुत ज्यादा पसंद करते है । दूसरा बेल अर्थात् लता यह पौधों का वह प्रकार है जिसका कोई अपना मजबूत स्तंभ या तना नहीं होता है । इनमें इतनी जान नहीं होती कि वह अपना ही बोझ संभाल सकें । इसलिए यह अपने आसपास के क्षेत्र में स्वतः फैल जाते हैं इनको इस बात का बिल्कुल ध्यान नहीं होता कि हम जिस जगह फैल रहे हैं वह कांटों से भरा कोई हानिकारक पेड़ पौधा या कीचड़, दलदल, इस तरह का कोई जगह तो नहीं है ...

लोकतंत्र में राजतंत्र Monarchy in democracy ( भाग-13 )

                                                              -:ओ३म्:-                                                   "लोकतंत्र में राजतंत्र" ( भाग-13 )                                      पूंजीवादी अर्थव्यवस्था एवं भारतीय अर्थव्यवस्था के विषय में बात करने से पूर्व कुछ और भी भारतीय सामाजिक व्यवस्था है जिस विषय में बात करना नितांत आवश्यक है ।           लेख संख्या 11 में मैं वसुधैव कुटुंबकम की चर्चा वहां कर आया हूं । मतलब संपूर्ण संसार के सभी जीव- जंतु एवं जड़-चेतन सभी पदार्थ हमारे परिवार के ही सदस्य हैं । इस वैश्विक परिवार के मूल केंद्र में हम सब को एक साथ जोड़ कर रखने वाली यह धरती है ।...