क्या बनें, मलिक या नौकर -5 ?
आगे जाने से पहले अब अतीत में पीछे झांक कर देखते हैं। पश्चिमी इंग्लैंड के एक छोटे से गांव स्टाइक में एक पादरी रिचर्ड क्लाइव के 13 बच्चों में रॉबर्ट क्लाइव सबसे बड़ा था। पढ़ाई में उसका मन नहीं लगा स्वभाव में वह बहुत ही आक्रामक, अड़ियल, लड़ाकू पर मजबूत इरादे वाला इंसान शुरू से ही था। किसी भी तरह आरंभिक पढ़ाई पूरी करके वह ईस्ट इंडिया कंपनी में क्लर्क का नौकरी प्राप्त कर लिया। उसकी नियुक्ति मद्रास प्रेसीडेंसी में हो गई। 19 मार्च 1743 को वह लंदन से चला और जल मार्ग से होते हुए 1 जून 1744 को वह मद्रास पहुंचा। वह लड़ाकू स्वभाव का था फलत: उसे क्लर्क की नौकरी अच्छी नहीं लगी। दो बार वह अपने आप को मारने की कोशिश की परंतु बच गया। वह समझ गया मैं किसी और काम के लिए बना हूं। यही से उसके सोच में पंख लग गए । एक अंग्रेज सर थॉमस रो 1615 से 1619 तक जहांगीर के दरबार में रहा उसे सूरत में नि:शुल्क व्यापार करने की अनुमति मिल गई। अंग्रेजों ने चंद्रगिरी के हिंदू राजा से अनुमति लेकर मद्रास में सैंटजॉर्ज क़िला 1652 में बनाया प्रेसिडेंट न...