महादेव जी (श्रधांजलि )
विद्वानों कि यह मान्यता है अगर आप अपने बच्चे को किसी विशेष मार्ग का सुपथिक बनाना चाहते है तो उन्हें बालपन में ही उस सांचे में ढालना होगा जैसा आप उन्हें चाहते है। मां के गर्भ में अगर संस्कार पड़ा हो तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर कुंजी मिलते ही संस्कारों का ताला खुलना तय है। जिस प्रकार मुंशीराम स्वामी श्रद्धानन्द बन गए। सातवलेकर जी कि रुचि तो चित्रकारी में थी पर उन्हें विवाह के पश्चात् कुंजी मिलते ही चमत्कार हुआ। आज उनकी गिनती वेदभाष्य कारों में होती है। त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम चन्द्र जी रावण पर विजय प्राप्त करने हेतु देवों के देव महादेव जी की आराधना किये थे। पर कलियुग तो विपरीत का नाम है यहां महादेव जी श्रीराम चन्द्र जी के उपासक है, रामलीला में, नाटक और गायन के माध्यम से याद करते रहे। समय-समय पर कुंजी भी बनाते रहे ताकि जीवन का ताला खोला जा सके। अपनी भी और सामने वाले की भी। एक दिन रामलीला करते-करते और ताला खोलते-खोलते श्रीराम चन्...