लोकतंत्र में राजतंत्र Monarchy in democracy (भाग-14)
-:ओ३म्:- लोकतंत्र में राजतंत्र ( भाग 14 ) आचार्य से प्राप्त ज्ञान को अपने व्यवहारिक जीवन में, समाज में, सभ्यता संस्कृति में, परंपराओं में, सामाजिक पद्धतियों में, लोकगीतों में, कविताओं में, कथाओं में, धार्मिक मान्यताओं में प्रवेश कराने का कार्य पुरोहित का होता है । आचार्य के बाद पुरोहित का ही समाज के प्रत्येक घरों के आंगन तक उनका पैठ होता है । पुरोहित वह है जो बिन बताए समाज के हित एवं राष्ट्र के कल्याण में अपनी पूर्णाहुति देने के लिए हमेशा तत्पर रहते है । आर्थिक, प्राकृतिक, ...